हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें।
वह एक परजीवी है।
अंधा और बहरा है,
बोलता बहुत है,
दूसरों की बातों को
तोलता बहुत है।
नए-नए स्वांग रच
मजमा लगाता है।
दूसरों के दुख को
अपना बताता है।
एक मसखरा है
अपनी बातों से वादों से
सब को बहलाता है।
हमारे देश में ऐसा जीव-
नेता कहलाता है।