Monday, March 15, 2021

मौत के बाद भी

मौत के बाद भी मुझको बुलाया, आँऊगा।
जो दिल में छुपा कर राज जहां से जाऊँगा....
उस हरिक राज से तब.... परदा हटाऊँगा।

सोचोगे क्यूँ जीवन-भर छुपाया था ये मैनें,
मुझे डर था कहीं तुम राह में ना छोड़ जाओ
जीते जी जुदाई मैं......... ना  सह पाऊँगा।

 मौत के बाद भी मुझको बुलाया, आँऊगा।

जानता हूँ, इक दिन मौत मुझको आयेगी
बिना पूछे,बिना बोले, मुझे ले जायेगी
मगर फिर भी खुशी के गीत मैं गाऊँगा।

मौत के बाद भी मुझको बुलाया, आँऊगा।

8 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 16 मार्च 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. मौत के बाद तो कौन किससे मिला है जो बताना है जीते जी बताने की हिम्मत चाहिए

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  3. ख़ामोशी ने सम्हाले हैं जो अब तक कहर के किस्से, यकीनन आना ही होगा वो तोहफ़े तो लौटाने

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