
कोई बुलाओ बादलों को, बरसात को जरा।
अब यार भी गर्मी में मिलने नही आते,
धरती के पेड़ पौधों में कोई रंग भरो हरा।
मौसम है बादलों का मगर बादल कहीं नहीं,
भटकता ना हो कहीं वो मेरा, भूल कर पता।
मिल जाए कहीं तुमको, खबर उसको कर देना,
परमजीत ने खरीद लिया छाता इक नया।






