Monday, September 3, 2007

छोटी-छोटी बातें

१.


छोटे लोगों की
छोटी चोट भी
बड़ी होती है ।
इसी लिए
अपनी आँख सदा
ज़ार-ज़ार रोती है।


२.


छोटेपन का एहसास
मुझे तब हुआ ।
जब मेरे सच पर भी,
उन्हें शक हुआ।


३.


इक छोटी-सी बात थी
पर रात भर चली।
बिन शब्दों के, बिन दीये के,
रात भर जली ।
सुबह उसी जगह पर
राख थी पड़ी ।


४.


बड़ी बात भी
छोटी हो जाती है।
जब वह बात भी
हरिक मन को भाती है।