इक दिन आना है उसे क्या इंतजार करें।
बेरंग जिन्दगी में , चलो कोई रंग भरें।
वैसे भी हमे मंजिल का कोई पता नही,
बस! चलो,चलना है , रुक के क्या करें।
ठहर पाया है कौन , इक पल भी यहाँ।
साँसो की डोरी,वक्त, रूकता है कब कहाँ।
जब कुछ नही है हाथ तेरे कोई क्या करे-
बस! इंतजार करता रहता है ये जहां।