हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें।
Thursday, April 22, 2010
मुर्दो की बस्तीयों में.....
मुर्दो को बस्तीयों में घर हमने बसाया है।
जो रूठ कर बैठा है, अपना ही साया है।
बहारों की तमन्ना, करते सभी हैं लेकिन-
सौंगात को यहाँ पर,कब किसने पाया है।
आग सब तरफ है बाहर भी और दिल में,
आतिशे मौसम, क्या लौट फिर आया है।
मज़हब के नाम पर, होते यहाँ धमाके -
या खुदा तूने, कैसा इंसान बनाया है।
परमजीत दिल दुनिया, देख पूछता है-
आकर यहाँ हमने, खोया क्या पाया है।
मुर्दो को बस्तीयों में घर हमने बसाया है।
जो रूठ कर बैठा है, अपना ही साया है।
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