
जो चिराग जलाए तूनें, आज मेरी कब्र पर।
बुझ ना जाए भूल से, ये कर्ज है हर शख्स पर।
वक्त की इस मार से मुझको भुला देना ना तू,
देखना है मौत का, तुझ पर हुआ है क्या असर।
मौत से मेरी तुझे गर, राह मिलती है कोई।
धन्य होऊँगा, जगी जो आत्मा तेरी सोई।
जाग कर सोना नही मेरे वतन के नौजवां,
माफ ना करूँगा तुझको, आँख जो कोई रोई।
पूछना है आज हर नेता से बस येही सवाल।
तेरा बेटा क्यूँ नही लेता है बन्दूके संम्भाल?
गर नही है आग तेरे भीतर वतन परस्ती की,
हाथों में पहन चूड़ी,पाँवों में घुँघरू ले डाल।