Thursday, June 11, 2009

आतंकवाद से हम क्यूँ हार रहे हैं

कितने धर्म हैं मेरे देश में
लेकिन एक अकेले
अधर्म को
नही हरा पा रहे हैं।
क्यूँ कि यहाँ सभी
अपनी-
अपनी ढपली बजा रहे हैं।
अपनी-
अपनी खिचड़ी अलग पका रहे हैं।

आज आतंक
वाद रूपी अधर्म से
कोई नही लड़ रहा।
जहाँ भी देखो-
हिन्दु का खून बहा,
मुस्लिम का खून बहा,
सिक्ख और ईसाई का खून बहा।
तुम से किस पागल ने कह दिया-
हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
आतंकवादी का धर्म है।
आतंकवाद का नाम ही तो
असल मे अधर्म है।

जब तक तुम सभी धर्म वाले
आपस मे लड़ने की बजाए
अधर्म रूपी आतंकवाद
से
एक हो कर नही लड़ोगे।
तब तक तुम सभी यूँही
एक एक कर के मरोगे।

आओ! सभी धर्म वालों
सब को निमंत्रण देता हूँ।
चलो! हम सब एक हो जाएं।
इस आतंकवाद रूपी अधर्मी राक्षस की
जड़े काटे,
इस राक्षस को मार गिराएं।
यदि तुम्हारे धर्म में,
कोई अधर्मी धर्मी बन कर बैठा है,
उसे बाहर का रास्ता दिखाएं।
निष्पक्ष हो यह कदम उठाएं।

अब तो समझों
हम आतंकवाद से क्यूँ हार रहे हैं?
क्यूँकि हम आतंकवाद को नही,
हिन्दु,मुस्लिम,सिख,ईसाई को मार रहे हैं।
इसी लिए बार-बार
आतंकवाद से हार रहे हैं।
इसी लिए बार-बार
आतंकवाद से हार रहे हैं।