
नयी सुबह का कर ले स्वागत
खुशीओं भरा तेरा साल हो।
महँगाई जितनी भी बढे....
बस! जेब मे तेरे माल हो।
देश- दुनिया की समस्याएं
जाएं सभी अब भाड़ में।
हरिक खुश हो जाए इस लिये
चढ़ाना सभी को झाड़ पे।
नया साल आता-जाता है
देश कहाँ कब बदला है।
नेता सभी पहचान चुके है
हर मतदाता.. पगला है।
इनको जितना लूट के खाओ
बस! चीखेगा चिल्लायेगा।
वोट देगा और तान के चादर
जा अपने घर सो जायेगा।
देशवासीयो अब तो सुन लो
देश ना यूँ चल पायेगा।
हाथ मे डंडा लेकर निकलो
नया साल तभी आयेगा।