Monday, March 19, 2007

पराविज्ञान-अंनुसंधान

क्या भूत-प्रेत व आत्माएं होती हैं ? आप क्या विचार रखते हैं ?
सभी ध्रर्म-ग्रन्थ आत्मा का अस्तिव स्वीकार करते हैं । श्रीगीता में भगवान श्रीकॄष्ण ने आत्मा को अजर-अमर माना है ।कुरान ऒर बाइबल भी आत्माओं को स्वीकारते हैं। फिर भी भूत-प्रेतों,जिन्नों को माननें वालों को अन्धविश्वाशी कहा जाता है ।क्या धर्मग्रन्थों की कही बातें झूठी हैं? कृपया बताएं ।
मै इस की जानकारी चाह्ता हूँ । इसी लिए मैनें इस प्रश्न को परिचर्चा में भी उठाया है । क्यूँकि हम जिन धार्मिक ग्रन्थों का संम्बल लेकर चल रहे हैं उन की कसोटी इस बात पर निर्भर करती है कि ये कही बातें सत्य है या असत्य । आज इन बातों को गंभीरता से लेना होगा । इसे मात्र अंधविश्वास कहना गलत होगा । इन्हें गलत कहनें का सीधा अर्थ होगा कि जिस का संम्बल लेकर हम चल रहे हैं वह सब भी गलत है। हमारे धार्मिक ग्रंथ मंत्रों से भरे पडे़ हैं ।जैसे- गायत्री मंत्र, प्रणव मंत्र और भी ना जानें हजारो-हजार मंत्र भरे पड़े हैं हमारे ग्रन्थों में । साथ में इस बात का भी दावा है कि मंत्रों में शक्ति होती है । इनसे आपकी कई समस्याओं का समाधान भी होता है । क्या ये असत्य है ? यदि ये सब गलत है तो हम किस दिशा की ओर जा रहे हैं ? तब हमारी आस्था का क्या होगा ?
आप सोच रहे होगें आज कम्पयूटर के युग में मैनें कौन-सा विषय चुना है । मेरा इस विषय को चुननें का कारण मात्र इतना है कि मैं इसे अन्धविश्वास नही मानता, बल्कि इसे भी एक विज्ञान मानता हूँ ।मंत्र विज्ञान वास्तव में ध्वनि-विज्ञान है,जो विभिन्न प्रकार की ध्वनियों को एक विशेष संयोजन मे रखकर उच्चारित करनें से एक विशेष प्रकार की शक्ति का प्रभाव उत्पन्न कर देता है जो हमारे अनुकूल परिस्थितयाँ उत्पन्न करनें में सहायक होता है।अब यह साधक के विवेक पर निर्भर करता है कि वह इस शक्ति का प्रयोग कैसे करे।
भूत-विज्ञान पर अपनें विचार बाद में लिखूँगा.......पहले आपके विचार जानना चाहता हूँ । कमेंट्स अवश्य करें ।

3 comments:

  1. जी हाँ भूत-प्रेत व आत्माएं होती हैं। मै पुरी तरह सहमत हुँ।
    जहाँ तक मंत्रो की बात है, मै मंत्रो से पुरी तरह सहमत हुँ, आज जो sound therapy, music therapy आदि का प्रचलन होता जा रहा है वो सब मंत्रो की ही देन है, ऐसा मेरा मानना है।
    बशर्ते की मंत्रजप कर्ता सही तरीके से जप करे।

    अब बात भुत-प्रेतो की तो इस पर कोई गहन अध्ययन नही है पर मै मानती हुँ कि इनका अस्तित्व होता है।

    आगे के आपके लेखो का इंतजार रहेगा

    शुक्रिया
    गरिमा

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  2. मैं आत्मा, भूत-प्रेत आदि को मानता हूँ। इस विषय में दिक्कत यह है कि अधिकतर लोग बिना सोचे समझे इसे खारिज कर देते हैं। किसी भी विषय को खारिज करने से पहले उसका अध्ययन करना चाहिए। इस विषय में मैं यही कहूँगा कि जिन लोगों को इनके अस्तित्व में शक है वे पहले धर्मग्रंथों, इससे संबंधित परामनोवैज्ञानिकों के अध्ययनों तथा इसके पीछे का विज्ञान पढ़ें और तब ही अपनी राय बनाएं।

    रही बात मंत्रों की तो इसके बारे में मैं काफी पहले से एक उदाहरण देता हूँ। जैसे एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम कई शब्दों से बना होता है जिन्हें एक विशेष क्रम में लगाकर वे किसी खास कार्य को क्रियान्वित करते हैं उसी तरह मंत्र भी कार्य करते हैं। 'मंत्र' कुछ खास शब्दों का समूह होता है जो एक विशेष क्रम में बोले जाने पर विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं।

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  3. परमजीत जी, मुझे आपके भुत विज्ञान का इंतजार है, कम से कम मेरे लिये ही सही आप भुत विज्ञान के ऊपर लिखिये...

    शुक्रिया
    गरिमा

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