जिस बात का ज्ञान हमे नही होता उस बात को पूरी तरह से नकार देना मूडता है। यदि ऐसा होता तो आज विज्ञान इतना उन्नत ना होता।लेकिन फिर भी कुछ बातों को नकारने से पहले हम कभी विचार करना ही नही चाहते।सामने वाले का सीधा प्रश्न होता है साबित करके दिखाओ। जबकि वह यह जानना ही नही चाहते कि हर बात को एक ही नियम के आधार पर साबित नही किया जा सकता।यहाँ इस बात को कहने का अभिप्राय यह है कि आध्यात्म और विज्ञान दोनों में बुनियादी फर्क है। जिस कारण उसे विज्ञान की भाँति साबित नही किया जा सकता।
पिछली पोस्ट यह अंधविश्वास नही है पर आई.... में आपको बताया गया था कि विज्ञान का आधार तर्क है और आध्यातम का आधार अनुभव। इस के अलावा एक और अंतर भी है कि विज्ञान प्रत्येक बात को तोड़ तोड़ कर जानने की कोशिश करता है जबकि आध्यात्म हर बात को जोड़ जोड़ कर जानने की कोशिश करता है।तीसरा बुनियादी फर्क यह है कि विज्ञान की कोई खोज या अविष्कार होने पर वह खोज सार्वजनिक हो जाती है, वहीं आध्यात्म के रास्ते पर चलने वाले की खोज व्यक्तिगत ही रहती है।चौथा फर्क यह है कि आध्यात्म पर चलने वाले की खोज (सिद्धि) का लाभ खोजने वाले (साधक या जानकार) की मदद के बिना नही उठाया जा सकता...जबकि विज्ञान की खोज कोई भी करे उस का लाभ सभी उठा सकते हैं।पाँचवां फर्क यह है कि विज्ञान की खोज का गलत प्रयोग का फल यह जरूरी नही है कि खोजकर्ता को भुगतना पड़े।जबकि आध्यात्म की खोज (सिद्धि) का गलत प्रयोग करने वाले खोजकर्ता (साधक या जानकार) को और खोज का लाभ उठाने वाले दोनों को ही भुगतना पड़ता है। यह सब जानकारी इस विधा के जानकारों की दी हुई ही है।
उपरोक्त जानकारी इस लिए दी गई है ताकि विज्ञान और आध्यात्म के बुनियादी फर्क को समझा जा सके। यहाँ पर पिछली पोस्ट पर आई एक टिप्पणी का जवाब देना चाहुँगा। क्योकि वह यह समझते हैं कि यहाँ पर मैं किसी एक पक्ष पर ही जोर देने की चैष्टा कर रहा हूँ। यहाँ पर स्पष्ट करना चाहुँगा कि मै एक जिज्ञासु हूँ......मैने बहुत कुछ अब तक के अपने जीवन में अपनी आँखो के सामने घटते देखा है जिसने मुझे अचंभित किया.....इसी लिए इस तह तक जाने की अभिलाषा मुझे है।
अब टिप्पणी की बात जो कि पिछली पोस्ट .यह अंधविश्वास नही है पर आई.... पर दी गई थी-:
@ योगेश जी, सिर्फ किसी बात से सहमत ना होने से कोई बात नही बनती।आप ने लिखा है कि"इलेक्ट्रोन कीको साबित किया जा सकता है। इलेक्ट्रोन दिखाई इस लिये नहीं देता क्योंकि ज्यों ही उस पर light डालते हैं वो light energy से vibrate हो जाता है।"
यही बात परमात्मा को मानने वाला भी कहता है, वह कहता है कि जब साधक साधना द्वारा परमात्मा में विलीन हो जाता है तो उसका उस समय स्व नष्ट हो जाता है जिस कारण वह उस के बारे में नही बता पाता। दूसरी बात वह दिखाई इस लिए नही देता कि वह एक अनुभव है अनुभूती है। लगता है आपने लेख ध्यान से नही पढ़ा।
वहाँ स्पष्ट लिखा है कि विज्ञान और आध्यातम मे कुछ बुनियादी फर्क हैं। पहला तो यही है कि विज्ञान का आधार तर्क है और आध्यात्म का आधार अनुभव।
तीसरी बात आप ने कही"इलेक्ट्रोन को आधार ले कर वैज्ञानिकों ने सैंकड़ों और नई theories दी हैं, जिससे हमने कईं और नये राज़ खोले हैं" इसी तरह आध्यातम ने भी कई राज जानें हैं...जिस मे से एक है सम्मोहन विधा...यदिवैज्ञानिक भाषा मे कहे तो हिप्नोटिज्म, मैस्मैराइज.....जिसे विज्ञान भी स्वीकारता है.....जो की मात्र भावना परआधारित है। यह खोज किसी इलेक्ट्रोन से नही की गई....यह अनुभव के आधार पर स्थापित की गई है।
चौथी बात आपने कही "आपकी पोस्ट से साफ झलक रहा है, that you post is biased towards GOD and bhoot pret."
यहाँ पर किसी बात का पक्ष नही लिआ जा रहा....पता नही आपने किस आधार पर ऐसा सोचा? यहाँ मैं यह स्पष्ट कर दूँ, कि मै विज्ञान का विरोधी नही हूँ.....क्या मुझे यह मालूम नही कि जिस माध्यम से हम आपस मे जुड़े हुए है वह विज्ञान की ही देन है ? जरा विचारीए की आपकी कही बात किस पर लागू होती है? आप को समझ आ जाएगा।
शेष फिर किसी पोस्ट में......








6 टिप्पणियाँ:
मेरे लिए आध्यात्म बस esp है मतलब एक्स्ट्रा सेंसरी परसेप्शन
दुनिया में हर काम प्रकृति के नियमानुसार होती है .. और इसे पूर्ण तौर पर समझ पाना और स्वीकार कर पाना आध्यात्म है .. और इसे समझनेवाला और स्वीकार कर पाने वाले व्यक्ति ज्ञानी माने जा सकते हैं .. इतने बडे ब्रह्मांड में जब पृथ्वी की कोई हैसियत नहीं .. तो एक व्यक्ति या व्यक्ति के समूह की क्या हैसियत हो सकती है .. विज्ञान के क्षेत्र में जो बडी से बडी उपाधि का हकदार होता है .. वो प्रकृति के एक बिल्कुल छोटे से रहस्य का खुलासा करता है .. जबकि ऐसे अनगिनत रहस्य भरे पडे हैं .. जो समय के साथ साथ उजागर होते रहेंगे !!
विज्ञान का आधार तर्क है और आध्यातम का आधार अनुभव। >>> मोटे तौर पर इससे सहमत हुआ जा सकता है!
aapki is post ne kai baaton par sochne ko majboor kar diya..........
vigyan aur adhyatm dono hi ek doosre se juda vidha hain.......na hum vigyan ke virodhi hain aur na hi adhyatm ke.......dono ki apni apni uplabdhiyan hain magar jahan tak vigyan ka sawaal hai wo apne tarkon ki kasauti par kaskar kuch pata hai magar adhyatm mein kahin koi tark nhi sirf anubhav aur jab insaan anubhav ke dam par kuch pata hai to uske baad use kuch aur janne ko shesh nhi rah jata.
विज्ञान और आध्यात्म दोनों अपने अपने अलग अलग रुख हैं ........ तर्क की कोई बात नहीं है इस पर .
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