हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें। ************************************************************************************************************************************ ************************************************************************************************************************************

Saturday, May 30, 2009

गजल


जब भरे हुए जामों को, कोई होठों से लगाए,
तुम ही बता दो यार कोई कैसे मुस्कराएं।

दिल की अन्धेरी शब में घुटकर मरे तमन्ना,
तब किसकी आरजू को हँस कर गले लगाएं।

दुनियामे जबहम आए थे दुनियाकी ठोकरों मे,
है कौन जो झुक के हमको, थाम अब उठाए।

हमें भेजनें वाले ,थी क्या खता हमारी ,
पत्थरों के इस जहाँ में,किसे दर्द ये बताएं

23 टिप्पणियाँ:

Mrs. Asha Joglekar said...

अच्छी गज़ल अच्छे भाव ।

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा गज़ल!! बधाई.

श्यामल सुमन said...

अच्छी कोशिश बात कहने की।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

रश्मि प्रभा... said...

bare hue zaamon ko hothon se lagaye,
koi kaise muskuraye....bahut khoob

दिगम्बर नासवा said...

लाजवाब ग़ज़ल है............ कुछ शेर तो कमल के हैं

vandana said...

bahut badhiya......shandaar.

नीरज गोस्वामी said...

बाली जी ग़ज़ल ठीक है काफिये बहर का ध्यान रखा नहीं हैं आपने...आप बहुत अच्छा लिखते हैं...इसीलिए आप से बेहतर ग़ज़ल की उम्मीद रखते हैं हम हमेशा...लिखते रहिये...
नीरज

"अर्श" said...

ACHHE BHAAV HAI AAPKI RACHNA ME .... BERADIF, BEBAH'R GAZAL MAAN LETE HAI CHALEGA MAGAR NEERAJ JI KE BAATO KO JARUR SAMAJHE.... AAPKI LEKHANI UMDAA HAI AUR KHUB BARASTI HAI.... DHERO BADHAAYEE


ARSH

Aarjav said...

बात तो पुरानी है लेकिन ढग कहने का नया है ! सुन्दर लगी रचना !

विनय said...

बहुत ख़ूबसूरत अंदाज़े-बयाँ

सुप्रतिम बनर्जी said...

बहुत सुंदर लिखा है आपने। सारा दर्द उढ़ेल दिया।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

पत्थरों के इस जहाँ में,किसे दर्द ये बताएं ।
---
सही भैया! मौन रहकर घूट पीना बेहतर पॉलिसी है।

Pradeep Kumar said...

wah kya baat hai !
ghazal ka pahlaa sher padhkar ye sher yaad aa gaya ( shayad haali ka hai )-
haal-e-dil yaar ko likhoon kyonkar ,
haath dila se judaa nahi hota

श्याम कोरी 'उदय' said...

... umdaa gajal !!!!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

मन और मस्तक दोनों को झकझोरती
सुन्दर गजल।
बधाई।

ड़ा.योगेन्द्र मणि कौशिक said...

अच्छी रचना है बधाई......!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

दिल की बात सुन्दर तरीके से कही हुई - बहुत खूब!

योगेन्द्र मौदगिल said...

बेहतर प्रयास.... बधाई एवं शुभकामनाएं...

Suman said...

good

शोभना चौरे said...

bhut pyari gajal

Nitish Raj said...

भई परमजीत बहुत अच्छी गजल। ये तस्वीर खुद खींची है क्या। अब मिलते रहेंगे।

MAYUR said...

उत्तम भावः, थोडा और सकारात्मक हुआ जा सकता है हमे आस पास के बारे में .

Dwarka said...

Jnab aapki kalm oor akal ko bagwqan barkat de KHUSHAMDEEN Shbaa Kher Thakur (ddthakur2@gmail.com)

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