जब भरे हुए जामों को, कोई होठों से लगाए,
तुम ही बता दो यार कोई कैसे मुस्कराएं।
दिल की अन्धेरी शब में घुटकर मरे तमन्ना,
तब किसकी आरजू को हँस कर गले लगाएं।
दुनियामे जबहम आए थे दुनियाकी ठोकरों मे,
है कौन जो झुक के हमको, थाम अब उठाए।
हमें भेजनें वाले ,थी क्या खता हमारी ,
पत्थरों के इस जहाँ में,किसे दर्द ये बताएं ।








23 टिप्पणियाँ:
अच्छी गज़ल अच्छे भाव ।
बहुत उम्दा गज़ल!! बधाई.
अच्छी कोशिश बात कहने की।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
bare hue zaamon ko hothon se lagaye,
koi kaise muskuraye....bahut khoob
लाजवाब ग़ज़ल है............ कुछ शेर तो कमल के हैं
bahut badhiya......shandaar.
बाली जी ग़ज़ल ठीक है काफिये बहर का ध्यान रखा नहीं हैं आपने...आप बहुत अच्छा लिखते हैं...इसीलिए आप से बेहतर ग़ज़ल की उम्मीद रखते हैं हम हमेशा...लिखते रहिये...
नीरज
ACHHE BHAAV HAI AAPKI RACHNA ME .... BERADIF, BEBAH'R GAZAL MAAN LETE HAI CHALEGA MAGAR NEERAJ JI KE BAATO KO JARUR SAMAJHE.... AAPKI LEKHANI UMDAA HAI AUR KHUB BARASTI HAI.... DHERO BADHAAYEE
ARSH
बात तो पुरानी है लेकिन ढग कहने का नया है ! सुन्दर लगी रचना !
बहुत ख़ूबसूरत अंदाज़े-बयाँ
बहुत सुंदर लिखा है आपने। सारा दर्द उढ़ेल दिया।
पत्थरों के इस जहाँ में,किसे दर्द ये बताएं ।
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सही भैया! मौन रहकर घूट पीना बेहतर पॉलिसी है।
wah kya baat hai !
ghazal ka pahlaa sher padhkar ye sher yaad aa gaya ( shayad haali ka hai )-
haal-e-dil yaar ko likhoon kyonkar ,
haath dila se judaa nahi hota
... umdaa gajal !!!!!
मन और मस्तक दोनों को झकझोरती
सुन्दर गजल।
बधाई।
अच्छी रचना है बधाई......!
दिल की बात सुन्दर तरीके से कही हुई - बहुत खूब!
बेहतर प्रयास.... बधाई एवं शुभकामनाएं...
good
bhut pyari gajal
भई परमजीत बहुत अच्छी गजल। ये तस्वीर खुद खींची है क्या। अब मिलते रहेंगे।
उत्तम भावः, थोडा और सकारात्मक हुआ जा सकता है हमे आस पास के बारे में .
Jnab aapki kalm oor akal ko bagwqan barkat de KHUSHAMDEEN Shbaa Kher Thakur (ddthakur2@gmail.com)
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