हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें। ************************************************************************************************************************************ ************************************************************************************************************************************

Monday, June 29, 2009

परमजीत ने खरीद लिया छाता इक नया



जलती धरा है ऐसे जैसे दिल मेरा जला।
कोई बुलाओ बादलों को, बरसात को जरा।

अब यार भी गर्मी में मिलने नही आते,
धरती के पेड़ पौधों में कोई रंग भरो हरा।

मौसम है बादलों का मगर बादल कहीं नहीं,
भटकता ना हो कहीं वो मेरा, भूल कर पता।

मिल जाए कहीं तुमको, खबर उसको कर देना,
परमजीत ने खरीद लिया छाता इक नया।




29 टिप्पणियाँ:

Anil Pusadkar said...

सच मे बादल पता भूल कर भटक रहा है शायद्।सुन्दर रचना।छाता तो मैने भी एक खरीदा है नया गाड़ी मे रखने के लिये।

डॉ. मनोज मिश्र said...

बधाई ,अब छाते की जरूरत पड़ने वाली है .

ali said...

सुन्दर प्रविष्टि ! देर आयद दुरस्त आयद , मानसून आ ही चुका है ! बधाई !

रानी पात्रिक said...

बहुत बढ़िया। छाता न खरीदते तो शायद कुछ जल्दी आ जाता आपको सराबोर करने, पर अब आराम से आ रहा है। या फिर प्रतीक्षा में होगा कि कुछ और लोग भी छाता खरीद लें तभी चलें। खैर मज़ाक अपनी जगह। रचना पढ़ कर मज़ा आया।

sada said...

बहुत ही दिल से पुकारा है बादलों को और उन्‍हें खबर भी हो गई है कि आपने छाता खरीद लिया है . . .बधाई ।

suresh sharma (cartoonist) said...

PARAMJIT BHAI, ASHAWAN RAHEN, CHATA KHARIDA HAI TO BARISH BHI JAROOR HOGI, WO KAHAWAT HAI NA..KUDRAT KE GHAR DER HAI ANDHER NAHI..AAPKI KAVITA BAHUT PASAND AAI HAI..

अभिषेक ओझा said...

बस अब आपके छाते का भरपूर उपयोग हो यही दुआ है !

राज भाटिय़ा said...

बस अब समय आ गया आप को छाते की जरुरत पडेगी,
बहुत सुंदर रचना, लेकिन मायूस ना हो बरसात जल्द ही होने वाली है.
धन्यवाद

ओम आर्य said...

bahut hi sahi samay par chhata kharidi hai sundar bhaw..........atisundar rachana

‘नज़र’ said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है

अनिल कान्त : said...

बहुत खूबसूरत रचना

JHAROKHA said...

आदरणीय बाली जी,
छाता आपने खरीद लिया है ---वह तो धूप,बरसात दोनों से बचायेगा।
बहुत उम्दा पन्क्तियां--शुभकामनायें।

Udan Tashtari said...

कर दी है खबर कि परमजीत ने छाता खरीद लिया..पूछ रहा था कि काहे खरीदा?

-बढ़िया रचना.

cartoonist anurag said...

badhai..
bahut sunder rachna....
kya bat hai dhara aour dil dono hi garm kar diye....

दिगम्बर नासवा said...

छाता तो खरीद लिया..........अब बरसात भी आ जाए तो मज़ा आ जाए ...... क्या बात है परमजीत जी

Vijay Kumar Sappatti said...

waah baali ji ,

itne khoobsurat tareeke se aapne sawan ka welcome kar rahe hai ..

badhai aapko .

Nirmla Kapila said...

वाह वाह बाली जी बहुत खूब पर मगर कहीं छाता देख कर वो डर गया तो सब मारे जायेन्गे इस गर्मी मे अभी छाता् बन्द ही रखिये रचना बहुत सुन्दर बन पडी है बधाई

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

छाता खरीदना तो मौसम में आस्था का प्रतीक है। काश सब खरीद पाते!

श्याम कोरी 'उदय' said...

... bahut khoob !!!!!

sandhyagupta said...

Bahut khub.Badalon tak aapke chata kharidne ki suchna pahunchana behad jaruri hai tab shayad is garmi se kuch nijat mile.

रश्मि प्रभा... said...

itni achhi kavita ke baad baadlon ki garjna hui hai.......bundon ne kaha hai,main aa gai

cartoonist anurag said...

paramjeet ji chata lene aa jaou.........
yahan bahut barish ho rahi hai......

mukesh said...

bali ji , bahut khoob
ab mosoon aa gaya hai, apki murad puri hui .
jab kharid liya hai chhata
to jald hoga barish se nata.

awaz do humko said...

bahut khoob

दर्पण साह "दर्शन" said...

INTZAAR...
INTZAAR...

APKA CHATA LAGTA HAI AGLE SAAL HI KAAM AAIYEGA !!

:(

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

बहुत बढ़िया...मौसम पर अच्छी रचना...इस सुन्दर रचना के लिये बहुत बहुत धन्यवाद...

रश्मि प्रभा... said...

yahan ke baadal jayenge, chhata kharidna saarthak hoga

hem pandey said...

ईश्वर करे हमें भी छाते की जरूरत पड़ जाए.

'अदा' said...

bahut hi badhiya abhivyakti,
khoobsurat...

Post a Comment

आप द्वारा की गई टिप्पणीयां आप के ब्लोग पर पहुँचनें में मदद करती हैं और आप के द्वारा की गई टिप्पणी मेरा मार्गदर्शन करती है।अत: अपनी प्रतिक्रिया अवश्य टिप्पणी के रूप में दें।