
कोई बुलाओ बादलों को, बरसात को जरा।
अब यार भी गर्मी में मिलने नही आते,
धरती के पेड़ पौधों में कोई रंग भरो हरा।
मौसम है बादलों का मगर बादल कहीं नहीं,
भटकता ना हो कहीं वो मेरा, भूल कर पता।
मिल जाए कहीं तुमको, खबर उसको कर देना,
परमजीत ने खरीद लिया छाता इक नया।








29 टिप्पणियाँ:
सच मे बादल पता भूल कर भटक रहा है शायद्।सुन्दर रचना।छाता तो मैने भी एक खरीदा है नया गाड़ी मे रखने के लिये।
बधाई ,अब छाते की जरूरत पड़ने वाली है .
सुन्दर प्रविष्टि ! देर आयद दुरस्त आयद , मानसून आ ही चुका है ! बधाई !
बहुत बढ़िया। छाता न खरीदते तो शायद कुछ जल्दी आ जाता आपको सराबोर करने, पर अब आराम से आ रहा है। या फिर प्रतीक्षा में होगा कि कुछ और लोग भी छाता खरीद लें तभी चलें। खैर मज़ाक अपनी जगह। रचना पढ़ कर मज़ा आया।
बहुत ही दिल से पुकारा है बादलों को और उन्हें खबर भी हो गई है कि आपने छाता खरीद लिया है . . .बधाई ।
PARAMJIT BHAI, ASHAWAN RAHEN, CHATA KHARIDA HAI TO BARISH BHI JAROOR HOGI, WO KAHAWAT HAI NA..KUDRAT KE GHAR DER HAI ANDHER NAHI..AAPKI KAVITA BAHUT PASAND AAI HAI..
बस अब आपके छाते का भरपूर उपयोग हो यही दुआ है !
बस अब समय आ गया आप को छाते की जरुरत पडेगी,
बहुत सुंदर रचना, लेकिन मायूस ना हो बरसात जल्द ही होने वाली है.
धन्यवाद
bahut hi sahi samay par chhata kharidi hai sundar bhaw..........atisundar rachana
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है
बहुत खूबसूरत रचना
आदरणीय बाली जी,
छाता आपने खरीद लिया है ---वह तो धूप,बरसात दोनों से बचायेगा।
बहुत उम्दा पन्क्तियां--शुभकामनायें।
कर दी है खबर कि परमजीत ने छाता खरीद लिया..पूछ रहा था कि काहे खरीदा?
-बढ़िया रचना.
badhai..
bahut sunder rachna....
kya bat hai dhara aour dil dono hi garm kar diye....
छाता तो खरीद लिया..........अब बरसात भी आ जाए तो मज़ा आ जाए ...... क्या बात है परमजीत जी
waah baali ji ,
itne khoobsurat tareeke se aapne sawan ka welcome kar rahe hai ..
badhai aapko .
वाह वाह बाली जी बहुत खूब पर मगर कहीं छाता देख कर वो डर गया तो सब मारे जायेन्गे इस गर्मी मे अभी छाता् बन्द ही रखिये रचना बहुत सुन्दर बन पडी है बधाई
छाता खरीदना तो मौसम में आस्था का प्रतीक है। काश सब खरीद पाते!
... bahut khoob !!!!!
Bahut khub.Badalon tak aapke chata kharidne ki suchna pahunchana behad jaruri hai tab shayad is garmi se kuch nijat mile.
itni achhi kavita ke baad baadlon ki garjna hui hai.......bundon ne kaha hai,main aa gai
paramjeet ji chata lene aa jaou.........
yahan bahut barish ho rahi hai......
bali ji , bahut khoob
ab mosoon aa gaya hai, apki murad puri hui .
jab kharid liya hai chhata
to jald hoga barish se nata.
bahut khoob
INTZAAR...
INTZAAR...
APKA CHATA LAGTA HAI AGLE SAAL HI KAAM AAIYEGA !!
:(
बहुत बढ़िया...मौसम पर अच्छी रचना...इस सुन्दर रचना के लिये बहुत बहुत धन्यवाद...
yahan ke baadal jayenge, chhata kharidna saarthak hoga
ईश्वर करे हमें भी छाते की जरूरत पड़ जाए.
bahut hi badhiya abhivyakti,
khoobsurat...
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