हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें। ************************************************************************************************************************************ ************************************************************************************************************************************

Sunday, July 12, 2009

बिखराव



अब तो अपने भीतर ही
अपनी साँसों से
जख्म होनें लगे हैं।
जो सजाए थे
मैने सपने कभी
वे रोने लगे हैं।
जरा -सी हवा के
झोकों से बिखर जाएंगे।
शायद फिर कभी
लौट कर ना आएगे।
यही सोच अब
सपनो मे रंग नही भरता।
लगता है कोई सपना
अब मेरा नही मरता।

आज की रात
चाँद भी बहुत उदास है।
लेकिन मेरे लिए
यह रात खास है।
बादलों का छेड़ना
चाँद को नही भाता।
उस को शायद
दिल लगाना नही आता।

प्यास गहरी हो
ओंस भी पी जाओगे।
शिकायत अपनों से
कैसे कर पाओगे?
मेरे मन उदास तुम
कभी मत होना।
अब अकेले में बैठ
मत रोना।

17 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

बहुत जबरदस्त बात कह गये, बधाई!!

विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत ही भाव भरी प्रस्तुति आपकी,
बधाई हो आपको इस सुंदर रचना के लिए..

"अर्श" said...

arse baad badh padh rahaa hun magar kya khoob kalam chalaayee hai aapne .... waah bahot bahot badhaayee shahib...


arsh

रश्मि प्रभा... said...

अपनी ही सांस से ज़ख्म होने लगे हैं.......
बहुत ही अच्छे भाव
यूँ तीनों क्षणिकाएं ही बहुत अच्छी हैं

दिगम्बर नासवा said...

teno अपने अपने रंग से bahri huyee........... lajawaab rachnaayen हैं ........ mazaa aa गया

mehek said...

waah tino rachanaye bahut hi lajawab hai,khas kar chandwali bahut pasand aayi.

vandana said...

bahut hi shandar abhivyakti hai........har kshnika lajawaab

JHAROKHA said...

आदरणीय बाली जी ,
आपकी तीनों ही रचनाएँ सुन्दर भावों को संजोये हैं ...बधाई .
पूनम

‘नज़र’ said...

सीधे दिल में उतर जाने वाली रचनाएँ
---
श्री युक्तेश्वर गिरि के चार युग

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

सरल और सुन्दर रचनायें जी।
धन्यवाद।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

मेरे मन उदास तुम
कभी मत होना।
अब अकेले में बैठ
मत रोना।
---------
आपने तो यह निदान बता दिया उदासी का मित्र।

Nirmla Kapila said...

baali jee ek baar nahin baar baar padha hai teeno ko bahut khoobsurat kashanikayen hain badhaai

creativekona said...

आदरणीय बाली जी ,
आपकी तीनों ही कवितायेँ बहुत अच्छी लगीं ....कम शब्दों के बावजूद एक अलग प्रभाव डालने वाली.
हेमंत कुमार

श्याम सखा 'श्याम' said...

सपनो में रंग नहीं भरता
खूब कल्पना है उदासी भरी लेकिन आज के माहौल मे सच

Paavan said...

Hi,

Thank You Very Much for sharing this informative and also effective article here with us...

Somnath | Junagadh District | Gir National Park

राकेश said...

बहुत ही शानदार प्रस्तुति , तीनो क्षणिकाये बहुत ही सुन्दर ,

बधाई आपको

सादर
राकेश

श्याम कोरी 'उदय' said...

... प्रसंशनीय रचनाएँ, बधाईंयाँ !!!

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