बहुत भागा ......
वक्त के साथ हो लूँ।
लेकिन
हमेशा पीछे छूट जाता हूँ।
वक्त से हारने पर,
अपने को सताता हूँ।
लेकिन
अब मैने वक्त के पीछे दोड़ना
छोड़ दिया है।
उस से मुँह मोड़ लिया है।
अब वक्त पर
बिछोना बिछा कर
उस पर लेट गया हूँ।
वक्त जहां चाहता है ,
मुझे ले जाता है।
अब मुझे वक्त नही सताता है।








23 टिप्पणियाँ:
great efforts, good words...
क्या बात है..बहुत उम्दा!!
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति !!
AB MUJHE WAQT NAHI SATATA HAI..
wah!
bahut sundar baali sahab ...
अब मैंने वक्त के पीछे दोड़ना छोड़ दिया है,
उससे मुंह मोड़ लिया है।
बहुत बढ़िया परमजीत भाई, बहुत खूब।
SACH KAHA ..... VAQT KI PEECHE BHAAGNE SE KUCH NAHI HAANSIL HOTA .... SANAY KE SAATH SAATH, USKE BAHAAV MEIN BAHNAA HI JEEVAN KI SAARTHAKTA HAI ,........ SUNDAR KAVITA HAI
वक्त को आगे से पकड़ो मित्र! दास बन जायेगा!
बहुत ही अच्छी रचना है......
वहुत सुंदर रचना,आप का धन्यवाद
बहुत सुन्दर !!!!!!!!1
waah waah...........lajawaab.
waqt ko kar mutthi mein
jisko jeena aa gaya
samjho wo hi zindagi ko
paa gaya
behad dil ko choone wali rachna.
read my new blog--http://ekprayas-vandana.blogspot.com
बहुत बडिया रचना है वक्त के बिछैने पर तो बैठना ही पडता है कितना भी भाग लो इस से आगे नहीं निकल सकते शुभकामनायें
bahut sundar
कमाल कर दिया बाली.....नहीं...बल्ले बल्ले. यार, बहुत दमदार रचना है. मन नाच उठा. इतनी जबर्दस्त मनोवैज्ञानिक कविता है की तारीफ के लिए शब्द नहीं मिल रहे हैं. मुझे लगता है यह आपसे हुई नहीं, आप पर उतरी है.
waqt ke upar aapne bahut achcha likha hai.......
अब मुझे वक्त नहीं सताता है,
बहुत सुन्दर !
अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी"में पिरो दिया है।
आप का स्वागत है...
कितना सहज हो गया सब कुछ.
बहुत अच्छे.
चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com
Bali ji,
bahut hee sundar aur arthapoorna kavita hai apakee.badhai sveekaren.
HemantKumar
बहुत ही सुन्दर सरल और सहज शब्दों में लिखी गयी कविता----
पूनम
barhi mushkil se tippani ka column mila to hindi bhasha ka tool nahi mila. Kavit itni sunder hai ki Hindi pakhwada jo jagah jagah nazar aata hai , main shaamil hote to yakinan pratham puruskar milta. Abhi to sarvotam kavita ki badhayee sweekar kijie.
wah wah !!
nishabd kar diya aapki rachna ne...
बहुत सुन्दर!
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