Thursday, September 10, 2009

वक्त से आगे वक्त से पीछे


बहुत भागा ......
वक्त के साथ हो लूँ।
लेकिन
हमेशा पीछे छूट जाता हूँ।
वक्त से हारने पर,
अपने को सताता हूँ।
लेकिन
अब मैने वक्त के पीछे दोड़ना
छोड़ दिया है।
उस से मुँह मोड़ लिया है।
अब वक्त पर
बिछोना बिछा कर
उस पर लेट गया हूँ।
वक्त जहां चाहता है ,
मुझे ले जाता है।
अब मुझे वक्त नही सताता है।

23 comments:

  1. क्या बात है..बहुत उम्दा!!

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति !!

    ReplyDelete
  3. AB MUJHE WAQT NAHI SATATA HAI..

    wah!

    bahut sundar baali sahab ...

    ReplyDelete
  4. अब मैंने वक्त के पीछे दोड़ना छोड़ दिया है,
    उससे मुंह मोड़ लिया है।
    बहुत बढ़िया परमजीत भाई, बहुत खूब।

    ReplyDelete
  5. SACH KAHA ..... VAQT KI PEECHE BHAAGNE SE KUCH NAHI HAANSIL HOTA .... SANAY KE SAATH SAATH, USKE BAHAAV MEIN BAHNAA HI JEEVAN KI SAARTHAKTA HAI ,........ SUNDAR KAVITA HAI

    ReplyDelete
  6. वक्त को आगे से पकड़ो मित्र! दास बन जायेगा!

    ReplyDelete
  7. वहुत सुंदर रचना,आप का धन्यवाद

    ReplyDelete
  8. waah waah...........lajawaab.
    waqt ko kar mutthi mein
    jisko jeena aa gaya
    samjho wo hi zindagi ko
    paa gaya

    behad dil ko choone wali rachna.

    read my new blog--http://ekprayas-vandana.blogspot.com

    ReplyDelete
  9. बहुत बडिया रचना है वक्त के बिछैने पर तो बैठना ही पडता है कितना भी भाग लो इस से आगे नहीं निकल सकते शुभकामनायें

    ReplyDelete
  10. कमाल कर दिया बाली.....नहीं...बल्ले बल्ले. यार, बहुत दमदार रचना है. मन नाच उठा. इतनी जबर्दस्त मनोवैज्ञानिक कविता है की तारीफ के लिए शब्द नहीं मिल रहे हैं. मुझे लगता है यह आपसे हुई नहीं, आप पर उतरी है.

    ReplyDelete
  11. अब मुझे वक्त नहीं सताता है,
    बहुत सुन्दर !

    ReplyDelete
  12. अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
    मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी"में पिरो दिया है।
    आप का स्वागत है...

    ReplyDelete
  13. कितना सहज हो गया सब कुछ.

    बहुत अच्छे.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

    ReplyDelete
  14. Bali ji,
    bahut hee sundar aur arthapoorna kavita hai apakee.badhai sveekaren.
    HemantKumar

    ReplyDelete
  15. बहुत ही सुन्दर सरल और सहज शब्दों में लिखी गयी कविता----
    पूनम

    ReplyDelete
  16. barhi mushkil se tippani ka column mila to hindi bhasha ka tool nahi mila. Kavit itni sunder hai ki Hindi pakhwada jo jagah jagah nazar aata hai , main shaamil hote to yakinan pratham puruskar milta. Abhi to sarvotam kavita ki badhayee sweekar kijie.

    ReplyDelete

आप द्वारा की गई टिप्पणीयां आप के ब्लोग पर पहुँचनें में मदद करती हैं और आप के द्वारा की गई टिप्पणी मेरा मार्गदर्शन करती है।अत: अपनी प्रतिक्रिया अवश्य टिप्पणी के रूप में दें।