Sunday, January 3, 2010

अब यह चुप्पी तोड़ दो



तुम से किसने कहा-
तुम चुप रहो....
अपने को संभालो
मत ऐसे बहो।


तुम्हारा चुप रहना ही
कमजोर बनाता है।
दूसरो की
हिम्मत बढ़ाता है।


जरा अपनी तरफ देखो-
तुम भी ठीक वैसे ही हो
जैसा वह है..
फिर किस बात का भय है ?


बस! गलत का साथ
इस लिए मत दो..
क्योकि वह वही है
जो तुम हो...
ऐसे रोने वालो के साथ
तुम मत रो ।
गलत का साथ दे
हम भी
कमजोर हो जाते हैं।
कोई रास्ता नजर नही आता..
हम चुप हो जाते हैं।


चुप कमजोर भी रहता है
और झूठा भी..
अपनों से नाराज
और रूठा भी...।
इस लिए अपने को
सही से जोड़ लो।
अब यह चुप्पी तोड़ दो।

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना . नववर्ष की शुभकामना

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्छी तरह से लिखा है

    ReplyDelete
  3. क्या बात है! बहुत बढ़िया कविता
    दीपक भारतदीप

    ReplyDelete
  4. बाली साहिब ....बहुत भावपूर्ण रचना है ....आपको ,आपके परिवार को नव वर्ष की मंगलकामनाएं तथा आपका बहुत बहुत आभार ...मेरी तुछ सी रचनाओं को ढेरों प्यार दिया है आपने .....साधुवाद !

    ReplyDelete
  5. सुंदर सकारात्मक द्ष्टिकोण.

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर संदेश दिया आप ने, इस सुंदर कविता के रुप मै. धन्यवाद

    ReplyDelete
  7. काफी सुंदर और मन को छूनेवाली कविता..

    ReplyDelete
  8. jab bhi bola hai sach ,
    aur todi hai cchuppi.
    hum hee huye badnam ,
    hum hee banay jhoothi.

    apka sandesh bahut aacha hai
    par................

    ReplyDelete

आप द्वारा की गई टिप्पणीयां आप के ब्लोग पर पहुँचनें में मदद करती हैं और आप के द्वारा की गई टिप्पणी मेरा मार्गदर्शन करती है।अत: अपनी प्रतिक्रिया अवश्य टिप्पणी के रूप में दें।