Saturday, November 20, 2010

कोई ढूंढ के लाओ.......

कोई ढूंढ के लाओ सपने मेरे,
कहाँ खो गए अपने मेरे।
ना जानें क्यूँ  याद बहुत आती हैं,
सदा रहती हैं जो घेरे। 
 
जीनें को जीए जाते हैं यहाँ,
गम  हँस के पीए जाते हैं यहाँ,
बहकाती हैं हावायें मुझे छू छू के ,
हर हवा कहती है चल संग मेरे।

कोई ढूंढ के लाओ सपने मेरे,
कहाँ खो गए अपने मेरे।

सागर भी मुझे बुलाता है,
अपनी लहरों मे छुपाना चाहता है।
समझ आता नही जाँऊ मैं कहाँ...
सोच रहती है मुझे बस, यही घेरे।


कोई ढूंढ के लाओ सपने मेरे,
कहाँ खो गए अपने मेरे।

17 comments:

  1. इसे पढकर ऐसा लगा मानों कवि की सोच, अनुभूति, स्मृति और स्वप्न सब मिलकर काव्य का रूप धारण कर लिया हो। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    फ़ुरसत में .... सामा-चकेवा
    विचार-शिक्षा

    ReplyDelete
  2. अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

    ReplyDelete
  3. कोई ढूंढ के लाओ सपने मेरे,
    कहाँ खो गए अपने मेरे।
    ना जानें क्यूँ याद बहुत आती हैं,
    सदा रहती हैं जो घेरे।

    bahut khub!! bahut pyara dard ubhar aaya hai.......!!

    ReplyDelete
  4. बहुत पसन्द आया
    हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद

    ReplyDelete
  5. जीनें को जीए जाते हैं यहाँ,
    गम हँस के पीए जाते हैं यहाँ,
    बहकाती हैं हावायें मुझे छू छू के ,
    हर हवा कहती है चल संग मेरे ...

    कुछ कुछ उदासी लिए ... पर दिल में उतरती हुयी ... लाजवाब रचना है ..

    ReplyDelete
  6. कोई ढूंढ के लाओ सपने मेरे,
    कहाँ खो गए अपने मेरे।
    ना जानें क्यूँ याद बहुत आती हैं,
    सदा रहती हैं जो घेरे।
    बहुत सुन्दर भाव संग्रह्।

    ReplyDelete
  7. यही खोज तो जीवनभर चलती है।

    ReplyDelete
  8. सच मे जीने की आपाधापी में अपने और सपने दोनो खो जाते है

    ReplyDelete
  9. मन से निकले भाव हमेशा सुंदर रचना का आकार ही लेते हैं. सो आपकी ये रचना बहुत अच्छी मार्मिक रचना लगी.

    ReplyDelete
  10. बहुत सुन्दर कविता है. मन के भाव जैसे आकार ले रहे हों...

    ReplyDelete
  11. हर हवा कहती है चल संग मेरे।
    बहुत सुन्दर पंक्ति, सुन्दर गीत। बधाई।

    ReplyDelete
  12. बेहतरीन रचना। लेकिन खो गये सपने फिर कहाँ मिलते हैं। शुभकामनायें।

    ReplyDelete
  13. Dil kee udasee jab shabdon me utarti hai to kawita ban jatee hai. Sunder prastuti

    ReplyDelete
  14. जीनें को जीए जाते हैं यहाँ,
    गम हँस के पीए जाते हैं यहाँ,
    बहकाती हैं हावायें मुझे छू छू के ,
    हर हवा कहती है चल संग मेरे।
    bahut hi achhi rachna ...
    vatvriksh ke liye apni rachnayen -nazariyaa aur ek murge kee maut bhejen , parichay tasweer aur blog link ke saath rasprabha@gmail.com per

    ReplyDelete
  15. बहकाती है हवा छू छू के...... अजी कोई कैसे ढूँढ के लाए भला, जब वो खुद आपके अंदर ही है.

    वैसे ये आपकी ही तस्वीर है न!

    ReplyDelete

आप द्वारा की गई टिप्पणीयां आप के ब्लोग पर पहुँचनें में मदद करती हैं और आप के द्वारा की गई टिप्पणी मेरा मार्गदर्शन करती है।अत: अपनी प्रतिक्रिया अवश्य टिप्पणी के रूप में दें।