Wednesday, May 22, 2013

क्षणिकाएं

मेरा सच
मुझे ही मुँह चिढाता है
जब उसे सुन
कोई मेरा अपना ही
दुखी हो जाता है।

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 मैंने जो पाया
उसमे  उन्हें
साजिश लगती है।
उसे पाने में 
मैंने क्या खोया
वे जानना नही चाहते....
उन्हें बस अपनी सोच
वाज़िब लगती है।
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कहो कुछ ऐसी
जिस बात तो
सब समझे।
वो भी
क्या कहना हुआ
तुम्हारी बात को
बस तुम समझे।

12 comments:

  1. अर्थभरी व भावभरी क्षणिकाएँ

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  2. सुन्दर....
    देखने में छोटी लेकिन अर्थपूर्ण...

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  3. अर्थपूर्ण ... अपना अपना अर्थ ढूंढते हैं सब ...
    सभी लाजवाब ...

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन खुद को बचाएँ हीट स्ट्रोक से - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. आपकी प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    धन्यवाद

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  6. सभी क्षणिकाएं एक से बढ़कर एक ...
    आभार

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  7. बेहतरीन...अर्थपूर्ण....

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  8. संक्षेप में बहुत कुछ कहदिया |
    आशा
    asha

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  9. हर एक क्षणिका लाजवाब
    साभार !

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  10. कम शब्दों में भी क्या कुछ नहीं कहा जा सकता.

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  11. बहुत सुंदर आपकी क्षणिकाएं ।

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