हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें। ************************************************************************************************************************************ ************************************************************************************************************************************
Friday, March 14, 2008
नकली दाँत
जब भी वह सामनें से गुजरते थे।
मुस्कराते हुए गुजरते थे।
उन की मुस्कराहट हमेशा मेरे मन को,
एक अजीब -सा सकून दे जाती थी।
ना जाने कितनें बरसो से
मैं उन्हें यूँ ही देख रहा हूँ
वह हर जगह
जहाँ भी वह टकराते थे,
मुस्कताते थे।
लेकिन एक दिन,
जब सड़क पार करते हुए,
मैं एक तेज जाती कार की चपेट में आ गया।
अंधेरा-सा मेरी आँखों मे छा गया।
मैं छिटक कर सड़्क के बीच पड़ा था।
वह फिर मुझे नजर आए
मुझे देख कर
फिर वैसे ही मुस्कराए।
और आगे चल दिए।
उस दिन मैं उन की
मुस्कराहट से बदहवास हुआ।
उन की मुस्कराहट के पीछे छुपे
नकली दाँतों का मुझे एहसास हुआ।
मुस्कराते हुए गुजरते थे।
उन की मुस्कराहट हमेशा मेरे मन को,
एक अजीब -सा सकून दे जाती थी।
ना जाने कितनें बरसो से
मैं उन्हें यूँ ही देख रहा हूँ
वह हर जगह
जहाँ भी वह टकराते थे,
मुस्कताते थे।
लेकिन एक दिन,
जब सड़क पार करते हुए,
मैं एक तेज जाती कार की चपेट में आ गया।
अंधेरा-सा मेरी आँखों मे छा गया।
मैं छिटक कर सड़्क के बीच पड़ा था।
वह फिर मुझे नजर आए
मुझे देख कर
फिर वैसे ही मुस्कराए।
और आगे चल दिए।
उस दिन मैं उन की
मुस्कराहट से बदहवास हुआ।
उन की मुस्कराहट के पीछे छुपे
नकली दाँतों का मुझे एहसास हुआ।
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8 टिप्पणियाँ:
ha ha ha
बेहतरीन कविता है।
उस दिन मैं उन की
मुस्कराहट से बदहवास हुआ।
उन की मुस्कराहट के पीछे छुपे
नकली दाँतों का मुझे एहसास हुआ।
bahut hi badhiya kaha,nice
esa lagta hai, har koe yahan nakli daant lagaye hain. bus hamari kami reh jaati hai, unhe pehchanane main.Baliji aap to daanton ki kehte ho, yahan to kahin kahin poora mukhauta hi nakli hai.
Aap ki kavita yatharth ke daratal pal khari utri hai. Aisi bahaduri se aap ne kaha hai varna aaj ka kavi to veh sab likhne ki sochta hai , jo logon ko pasand aave.
Swagat hai aap jaise sach bolne ki himmat rakhne wale kavion ka-------
esa lagta hai, har koe yahan nakli daant lagaye hain. bus hamari kami reh jaati hai, unhe pehchanane main.Baliji aap to daanton ki kehte ho, yahan to kahin kahin poora mukhauta hi nakli hai.
Aap ki kavita yatharth ke daratal pal khari utri hai. Aisi bahaduri se aap ne kaha hai varna aaj ka kavi to veh sab likhne ki sochta hai , jo logon ko pasand aave.
Swagat hai aap jaise sach bolne ki himmat rakhne wale kavion ka-------
सचमुच बहुत बढिया कविता , अभियक्ति सुंदर और भावपूर्ण !
उस दिन मैं उन की
मुस्कराहट से बदहवास हुआ।
उन की मुस्कराहट के पीछे छुपे
नकली दाँतों का मुझे एहसास हुआ।
------------------------
भावनात्मक अभिव्यक्ति
दीपक भारतदीप
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