हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें। ************************************************************************************************************************************ ************************************************************************************************************************************

Saturday, September 20, 2008

नजरिया

मेरा सच
तुम्हारा भी सच हो
यह हमेशा जरूरी तो नहीं होता।
रोना बच्चों का स्वाभाव है।
लेकिन
सिर्फ भूख के लिए -
हर बच्चा तो नही रोता।

21 टिप्पणियाँ:

Vivek Gupta said...

सुंदर कविता

Udan Tashtari said...

क्या बात है, कितनी गहरी बात कह गये, परमजीत!!! छा गये भाई..बधाई!!!

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

you are very true.

दीपक भारतदीप said...

क्या बात है परमजीत बाली जी, आपकी इन पंक्तियों पर मेरा यह कह्हे के मन कर रहा है
दीपक भारतदीप
---------------
चेहरे पर हंसी होने का मतलब हमेंशा
दिल का खुश होना नहीं होता
कई लोग खिलखिलाते हैं दूसरों को
हँसाने के लिए
ताकि उनके पेट की भूख मिट जाए
आंसू बहाना भी हमेंशा रोना नहीं होता
कुछ लोग रोते हैं दूसरे को दहलाने के लिए
ताकि चंद सामान मिल जाए
अपने मन की भूख मिटाने के लिए
इंसान खेलता है जज्बातों के साथ
जो उसके लिए कभी पराया तो कभी अपना होता
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Advocate Rashmi saurana said...

bhut badhiya. jari rhe.

जितेन्द़ भगत said...

nice thought

कुन्नू सिंह said...

वाह कीतना अच्छा कविता लीखें हैं।
बहुत गहराई है।
धन्यवाद!

aloka said...

Namskar or Jharkhadi Johar

AAp ki rachan bhaw ko chuti hai. kuchh new meli aysi ummid humeri hai.

रश्मि प्रभा said...

kam lafzon me kitni gambheer baat kahi hai.....
main vismit hun,tarif ke shabd kam padenge

वर्षा said...

कम शब्दों में बहुत कहा।

seema gupta said...

रोना बच्चों का स्वाभाव है।
लेकिन
सिर्फ भूख के लिए -
हर बच्चा तो नही रोता।
"very deep thought from heart"

Regards

harminder singh said...

baat kum shabdon mein hai lekin gehri hai.

dhanyabad

harminder singh
(vradhgram)

माधव त्रिपाठी said...

क्या बात है , इसे पढ़कर मुझे भी कुछ कहने का जी कह गया --
हँसते हुए चेहरे के पीछे भी रोते रहते हैं कई
आँखे खुली होने पर भी सोते रहते है कई
कुछ न नजर आने पर भी हादसे होते रहते है कई

Dr. Amar Jyoti said...

बहुत सुन्दर और सारगर्भित।

BrijmohanShrivastava said...

मेरा सच तुम्हारा सच नहीं हो सकता ,बात बहुत छोटी मगर बहुत गहरी ,एक गहन चिंतन की अपेक्षा करती हुई ,मेरी समझ में नही आता की मेरा सच किसी और का सच्नाहीं हो सकता पर कितना विचार करूं-दर्शनशास्त्र देखू या प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में खोजूं किसी रात नींद उचाट गई तो इसपर विचार करूंगा वैसे दिल दी डायरी में भी और एक जेब में रखे पुर्जे पर भी नोट करलिया है कि किसी एक का सच दूसरे का सच नहीं हो सकता और कभी हुआ भी होगा तो वे कौनसी परिस्थितियां रहीं होंगी जब ऐसा हुआ होगा

jyoti saraf said...

mera sach tumhara b sach ho ye jaruri to nahi kya baat hai sir ji. maja a gaya vakai kam shabdo me bahut kuch kah diya apne

Anonymous said...

sirf bhukh keliye tobachha nhi rota
ye pnktiya mn ko choo gai.

gagr me sagr bhr li aapne.

ताऊ रामपुरिया said...
This post has been removed by the author.
ताऊ रामपुरिया said...

सिर्फ भूख के लिए -
हर बच्चा तो नही रोता।

bahut sahi kaha aapane |

swati said...

sach hai....aur sampurna

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही कहा आप ने....
मेरा सच तुम्हारा भी सच हो....
दो शव्दॊ मे कितना सच छुपा कर कह दिया...
धन्यवाद

लेकिन यह पोस्ट आज केसे आ गई जब की यह तो २० या २१ को डाली थी, मुझे आज मिली.

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