हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें। ************************************************************************************************************************************ ************************************************************************************************************************************

Tuesday, February 3, 2009

खाली मन


अब नही दोड़ता मन
लेकिन थका नही ।
पक कर टूट
जमीन पर आ गिरा है।
जैसे कोई तिन्का
अथाह सागर मे तिरा है।

*******************
जब मन ठहर जाता है
तो शब्द टूट-टूट कर
अर्थहीन बिखरने लगते हैं।
तब कोई भाव नही
खुशी के दीप जगते हैं।

*********************
जानता हु ,ठहरा हुआ मन
फिर एक दिन धक्का खाऐगा।
फिर अपनी राह पर
पहले जैसा चलायमान हो जाऐगा।

********************
(चित्र गुगुल से सभार)

17 टिप्पणियाँ:

PN Subramanian said...

रचना सुंदर है. धक्के या झटके के बगैर अपने आप कुछ हो ही नहीं पाता?

"अर्श" said...

बाली साहब मुक्तक लेखन में आपके लेखनी का क्या कहना ,हलाकि तीनो मुक्तक एक से बढाकर एक है मगर साहब मुझे दूसरा मुक्तक बहोत ही पसंद है बहोत ही बढ़िया भाव है ढेरो बधाई आपको


अर्श

mehek said...

bahut sundar khali mann ke bhav liye rachanaye badhai

Kishore Choudhary said...

मन की मन ने सही जानी है, अच्छी रची !

रश्मि प्रभा said...

वाकई जब मन टूट जाता है, तो शब्द टूटकर ,
अर्थहीन से बिखरने लगते हैं..........
मन की दशा की सही अभिव्यक्ति....

vandana said...

man ke bhav anant hain aur jab tak khali hai tabhi tak ye hal hai uske baad sahi disha mein hi chalayman hoga kyunki man hai ye.

bahut sundar abhivyakti.

Pratap said...

बेहद सुंदर!!!!

नीरज गोस्वामी said...

क्या बात है भाई ...सुभान अल्लाह...वाह...
नीरज

अमिताभ श्रीवास्तव said...

bahut sundar rachna he.
जानता हु ,ठहरा हुआ मन
फिर एक दिन धक्का खाऐगा।
फिर अपनी राह पर
पहले जैसा चलायमान हो जाऐगा।
shabdo ki kataar aour uski manzil dono satik....
bahut khoob..dhanyvad

MAVARK said...

Well,FOR THE FIRST TIME TODAY VISITED YOUR THIS BLOG.DEAR YOU ARE GENUINELY SENSITIVE,EMOTIONAL, HONEST AND INTELLIGENT WHILE EXPRESSING YOUR SELF.GREAT/GOD BLESS YOU.
(MAVARK)

विनय said...

आप सादर आमंत्रित हैं, आनन्द बक्षी की गीत जीवनी का दूसरा भाग पढ़ें और अपनी राय दें!
दूसरा भाग | पहला भाग

विष्णु बैरागी said...

'फिर अपनी राह पर,
पहले जैसा चलायमान हो जाएगा'

इस आशावाद को नमन।

अनिल कान्त : said...

कितना खूबसूरत लिखा है आपने ...
जब मन ठहर जाता है ..तब शब्द टूट टूट कर ...

COMMON MAN said...

बाली साहब, आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं ये शब्द

rohitler said...

waah waah
bahut khoobsoorat

Ek Shehr Hai said...

बहुत खूबसूरत लिखा है।

काश ऐसा होता कि हमारे सारे शब्द अकड़ की जगह तरल अहसास मे बदल जाते।
धक्का लगाने वाले भी हमारी चाहतों की बाहों तले उड़ान मे खो जाते।

धक्का तो सभी सोचते हैं, काश कोई उड़ान भी सोच पाता

धक्का और उड़ान, इन दोनों के बीच मे हम सभी टहल रहे हैं। बहुत अच्छा है। शब्द धक्का है तो चित्र उड़ान का है।

कोई धक्का देता है तो कोई उड़ान भरता है।

Dr.Bhawna said...

सुंदर अभिव्यक्ति..

Post a Comment

आप द्वारा की गई टिप्पणीयां आप के ब्लोग पर पहुँचनें में मदद करती हैं और आप के द्वारा की गई टिप्पणी मेरा मार्गदर्शन करती है।अत: अपनी प्रतिक्रिया अवश्य टिप्पणी के रूप में दें।