हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें। ************************************************************************************************************************************ ************************************************************************************************************************************

Friday, March 20, 2009

गजल


जब भरे हुए जामों को, कोई होठों से लगाए,
तुम ही बता दो यार कोई कैसे मुस्कराएं।

दिल की अन्धेरी शब में घुटकर मरे तमन्ना,
तब किसकी आरजू को हँस कर गले लगाएं।

दुनियामे जबहम आए थे दुनियाकी ठोकरों मे,
है कौन जो झुक के हमको, थाम अब उठाए।

हमें भेजनें वाले ,थी क्या खता हमारी ,
पत्थरों के इस जहाँ में,किसे दर्द ये बताएं

19 टिप्पणियाँ:

mehek said...

हमें भेजनें वाले ,थी क्या खता हमारी ,
पत्थरों के इस जहाँ में,किसे दर्द ये बताएं
waah behad lajawab

"अर्श" said...

khub....

दिगम्बर नासवा said...

हमें भेजने वाले, क्या थी खता हमारी

बहुत खूब है ग़ज़ल.......
इन लाइनों में जिंदगी का रस निचोड़ दिया है आपने, लाजवाब

रश्मि प्रभा said...

एक बेहतरीन ग़ज़ल.....गुनगुनाने का मन हुआ

RAJIV MAHESHWARI said...

बहुत खूब ......

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

गर सुख के हों जाम,

हमेशा हँस-हँस कर पी जाना।

गम सीने भरे अगर हों,

हाथों में मत जाम उठाना।

creativekona said...

आदरणीय बाली जी ,
बहुत सुन्दर गजल ...बधाई.
हेमंत कुमार

hem pandey said...

दर्द की सुंदर अभियक्ति है.लेकिन इतना निराशावादी होना भी ठीक नहीं.

विनय said...

वाह बाली जी कमाल कर दिया, आनन्द साहब की याद आ गयी!

---
चाँद, बादल और शाम
गुलाबी कोंपलें

Milan said...

cool gazal.. i liked it...

neha said...

bahut badiya likha haa...........

bhootnath( भूतनाथ) said...

sach kahun to ye gazal acchi to hai....magar bahut acchhi to katyi nahin.....!!

मा पलायनम ! said...

बहुत खूब ,लाजवाब.

Harkirat Haqeer said...

हमें भेजने वाले , थी क्या खता हमारी
पत्थरों के इस जहां में ,किसे दर्द ये बताएं

वाह वाह...! बहोत खूब...!!

लाल और बवाल (जुगलबन्दी) said...

बहुत ख़ूब बाली जी। वाह वाह!

Dr.Bhawna said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...

bhootnath( भूतनाथ) said...

अच्छी है.....बस थोडी-सी हलकी.....परमजीत की पढ़ी हुई रचनाओं से थोडी कमतर.....!!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुन्दर!

Nirmla Kapila said...

बहुत सुन्दर गज़ल है बधाई

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