Sunday, April 5, 2009

न्याय की तलाश


मरे हुए लोगो के बीच,
न्याय की माँग करना,
मूर्खता कहलाता है।
इसी लिए हर नेता
हमे देख कर मुस्कराता है।
अपना हाथ हिलाता है।

किसे परवाह है
पच्चीस साल तक
जिन आँसुओं को
वे अपने फटे आँचल मे
समेटते रहे
उसे बहने से रोकनें के लिए
कोई आवाज उठाएगा!!!
न्याय के द्वारा
कोई उन आँसुओं की
कीमत चुकाएगा।
या फिर हमेशा की तरह
न्याय अन्याय के
नीचे दबकर
मर जाएगा।
हजारो लोगों की मौत
जिन्दा जलती चिताओं का धुँआ
किसी ने तो उठाया होगा।
क्या तुमने बिना आग के
धुँआ उठता देखा है?
क्या तुमने बिना मारे
किसी का कत्ल होते देखा है?
लेकिन हमारे देश में
ऐसा ही देखा जाता है।
इसी लिए
न्याय की तलाश में
आदमी
अन्याय के भार के नीचे
दबकर हर बार मर जाता है।
यह कहानी
किसी एक कौम के साथ नही
कई कौमों के साथ
दोहराई गई।
न्याय की कई बार
हँसी उड़ाई गई।
शायद इसी लिए
मेरा भारत महान
कहलाता है।

इसी लिए हर नेता
हमे देख कर मुस्कराता है।
अपना हाथ हिलाता है।


**********************

50 comments:

  1. सच कहा आपने
    अन्यायी से न्याय की , विनती सौ-सौ बार.
    भीख दया की माँगना , ज्यों निष्ठुर के द्वार.
    - विजय

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  2. धन्य है यह देश-और धन्य इसके नेता.

    बिल्कुल सटीक रचना.

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  3. बड़ा पेड़ गिरा तो ज़मीन हिली थी कहने वाले दोषी नहीं हुए तो उनके ईशारे पर मार काट करवाने वाले क्यों दोषी साबित होंगे . एक अपील मरहम न लगाये कोई बात नहीं लेकिन जख्म भी न कुरेदे तो अच्छा होगा नेताओ के लिए

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    1. अगर आप पीड़ित पतियों कि एक झलक देखना चाहते है तो कृपया एक नजर और अपने कीमती समय से थोडा टाइम निकाल कर कमल हिन्दुस्तानी के इस ब्लॉग पर नजर डाले www.becharepati.blogspot.in और इस ब्लॉग को अपनी राय और आशीर्वाद जरुर प्रदान करें | आपकी अति कृपया होगी धन्यबाद |
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  4. कोई क्यो उठाए आवाज?
    जिस को चोट लगी है
    खुद वही
    क्यों न लगाए आवाज
    उन सब को जिन्हें चोट लगी है,
    क्यों न करे?
    इकट्ठा सब को

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  5. ... बहुत प्रभावशाली अभिव्यक्ति है, इस रचना से प्रेरणा लेकर न्याय की दिशा मे कुछ कदम उठाना आवश्यक है।

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  6. sachhi satik rachana,yahi satya hai aaj ka.

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  7. सटीक्।्फ़िर भी मेरा देश महान।

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  8. माहौल के अनुरूप सही रचना है।

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  9. bahot hi satik rachna hai aaj ke netawo pe...


    arsh

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  10. क्या बात कह दी...........
    मरे हुवे लोगों से....
    क्या न्याय माँगना.....बहुत ही आक्रोच भरी रचना.....सत्य को यथार्थ को दर्शाती

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  11. bahut hi sahi kaha aapne............nyay milta kahan hai

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  12. परम जीट जी बहुत ही गहरी बात कही आप ने .... इन मरे हुये लोगो से....
    धन्यवाद

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  13. क्षमा कीजियेगा ...... कविताए लिखने से कुछ नहीं होगा .....!

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  14. nyaay ka prashn hi apne aap mein ek hasya hai,kise milta hai nyaay,sahi to kaha aapne.....mrit logon se nyaay ki kaisi maang !

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  15. Bali ji,
    bahut achchhee yatharthparak kavita ..badhai.
    HemantKumar

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  16. सही अर्थों में न्याय तो अब किताबी बातें ही रह गयीं हैं। कहते हैं कि-

    हजारों जुर्म करके भी फिरें उजले लिबासों में।
    करिश्मे हैं सियासत के ,वकीलों के, अदालत के।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  17. एकदम सत्य.. कमाल की अभिव्यक्ति के साथ आपने इस कड़वे सच को परोसा.. आभार

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  18. परमजीत जी ,आपने बड़ी सटीक बात कही ........
    पर इन नेताओ के कान पर जू नहीं रेगीगी

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  19. waah baali saheb , bahut hi sashakt rachna , aapne bahut sanvedanpoorn mudde ko uthaya hai .. aap badhjai ke paatr hai ..

    vijay

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  20. you have written very true. i am agree from you

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  21. वर्तमान के संदर्भ में आपकी ये कविता बिल्कुल सटीक बैठती है....अभार

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  22. ओह, चिदम्बरम जी पर उठे जूते की सनसनी का बेस समझ आ रहा है।

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  23. शायद दर्द यही था जिस कारण चिदम्बरम पर जूता आया
    आह आपकी असर कर गई, अब फिरता है कुनबा भिन्नाया
    न्याय छीनना छल बल कल से, कोई अच्छी रीत नही है
    आक्रोश अमर्यादित हो जाना ,लोकतंत्र की जीत नहीं है
    न्याय तन्त्र ही लोक तन्त्र है जहाँ भेद स्थान न पाता
    यदि व्यवस्था यह न समझे ,तब तो रक्छा करे विधाता

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  24. इस एहसास को अभी आम आदमी के भीतर चिंगारी बनना बाकी है...

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  25. बहुत सटीक लेखन बहुत-बहुत बधाई...

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  26. हजारों लोगों की मौत
    जिंदा जलती चिताओं का धुंआ
    किसी ने तो उठाया होगा
    क्या तुमने बिना आग के
    धुंआ उठते देखा है ?
    क्या तुमने बिना मारे
    किसी का कत्ल होते देखा है ?

    बलि जी सामयिक विषय पर प्रश्न खडा करती एक प्रभावशाली रचना है आपकी....बहुत बहुत बधाई .....!!

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  27. kisi insaan ko kuch bhi kyo na sehna pade sadev ek aam insaan ko hi suffer karna padta hai kyoki jab ek aam insaan neta ban jata hai to who bhi apni jebe bhrne ki hi sochta hai na ki janta ke haq aur us ki jarurato ki.

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  28. upar photu ke saath ye kavita ek adbhoot jugalbandi karti hai,
    kavita acchi ban pai hai.

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  29. बहुत ही प्रभावशाली रचना है, आंखें खोलने वाली एक हक़ीक़ीकत है।
    न्याय की तलाश में
    आदमी
    अन्याय के भार के नीचे
    दबकर हर बार मर जाता है।
    सारी ही रचना बार बार पढ़ने को दिल करता है।

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  30. 'न्याय की तलाश में
    आदमी
    अन्याय के भार के नीचे
    दबकर हर बार मर जाता है.'

    -कड़वा सच कहा है.

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  31. Adarneeya Bali ji,
    bahut badhiya yatharthpoorn kavita...
    Poonam

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  32. परमजीत जी, आप ने अपनी इस कविता के माध्यम से बहुत बड़े सच को अभिव्यक्ति दी है।

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  33. हर स्तम्भ में लाशों के सौदागर बैठे हैं, न्याय की आस किस से करें? ऐडियां घिसते उम्र बीत जायेगी, इन सबकी नूरा-कुश्ती यूँ ही चलती रहेगी...

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  34. दिल को छू लेने वली अभिव्यक्ति है

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  35. सुन्दर रचना!
    बधाई.

    वो क्या देगा न्याय
    जो न जानता है कि
    क्या होता है न्याय
    वो क्या देगा न्याय
    जो जीवन भर किया है अन्याय
    न्याय और अन्याय के बीच
    मरती है भोली जनता
    वो क्या जानेगा इसका दर्द
    जो है खुद बेदर्द

    आपका
    महेश
    http://popularindia.blogspot.com/

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  36. बहुत सही!!

    किससे क्या आशा लगाये बैठे हैं?? हकीकत बयान कर दी..बेहतरीन!!

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  37. आपने बहुत सही लिखा है... बस यही दो लाइने याद आ गयी-
    इंसा इंसा को क्या देगा, जो देगा खुदा ही देगा
    मेरा मुनसिफ ही मेरा कातिल है, मेरे हक़ में फैसला क्या देगा..|

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  38. अगर आप पीड़ित पतियों कि एक झलक देखना चाहते है तो कृपया एक नजर और अपने कीमती समय से थोडा टाइम निकाल कर कमल हिन्दुस्तानी के इस ब्लॉग पर नजर डाले becharepati.blogspot.in और इस ब्लॉग को अपनी राय और आशीर्वाद जरुर प्रदान करें | आपकी अति कृपया होगी धन्यबाद |
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  39. अगर आप पीड़ित पतियों कि एक झलक देखना चाहते है तो कृपया एक नजर और अपने कीमती समय से थोडा टाइम निकाल कर कमल हिन्दुस्तानी के इस ब्लॉग पर नजर डाले www.becharepati.blogspot.in और इस ब्लॉग को अपनी राय और आशीर्वाद जरुर प्रदान करें | आपकी अति कृपया होगी धन्यबाद |
    kamalsharma440@gmail.com mobile :- 09034048772,09045783454

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