Sunday, December 7, 2008

परजीवी

वह एक परजीवी है।

अंधा और बहरा है,

बोलता बहुत है,

दूसरों की बातों को

तोलता बहुत है।

नए-नए स्वांग रच

मजमा लगाता है।

दूसरों के दुख को

अपना बताता है।

एक मसखरा है

अपनी बातों से वादों से

सब को बहलाता है।

हमारे देश में ऐसा जीव-

नेता कहलाता है।

16 comments:

  1. neta ko par jeevii kahnaa saarthak prayog hai, aur sach bhii!

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  2. बहुत खुब ! आप ने सही पहचान बताई.
    धन्यवाद

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  3. नई परिभाषा । अच्‍छी परिभाषा । वाह ।

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  4. बेहतर संज्ञा है परिजिवी ,मैं तो कहता हूँ के ये परभ्छी भी है जो दूसरो का सिर्फ़ भछन करना जानते है ....... बहोत खूब लिखा है आपने .......

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  5. अच्छी ऐसी की तैसी की नेताओं की. आभार.

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  6. aapki kavita netaon se aam aadmi ki upji hatasha ko bayaan karti hai

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  7. बहुत अच्छा लिखा है।

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  8. this is the best description of a politician in our country .

    bahut badhai . bahut accha likha hai .

    vijay

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  9. paramjeet jee,
    parjeevee rachna netaon par teekhee tippdee hai.ye bahroopiye jane kitne roop badal kar hamare samne aate hain. kabhee joker,kabhee bhikharee kabhee geedad.
    likhte rahiye isee tarah .

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  10. sorry bandhu,
    fir se likh raha hoon.aapkee parjeevee bahut umda hai .chal baj netaon kee pole aapne achee khole ai
    badhai.

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  11. paramjeet jee,
    parjeevee rachna netaon par teekhee tippdee hai.ye bahroopiye jane kitne roop badal kar hamare samne aate hain. kabhee joker,kabhee bhikharee kabhee geedad.
    likhte rahiye isee tarah .

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  12. ओ बाली जी....आपने तो आज बड़ी गहरी बात कह डाली.....वो भी चुटीले अंदाज़ में.....बहुत अच्छी बन पड़ी है.....आपको धन्यवाद ऐसी रचना प्रदान करने के लिए....!!!

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  13. क्या बात है - पर उस जीव को क्या फर्क पड़ने वाला है!

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