हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें। ************************************************************************************************************************************ ************************************************************************************************************************************

Monday, December 15, 2008

चलना होगा तुझे अकेला


चलना होगा तुझे अकेला।

किस का रस्ता देखे मन तू,

अम्बर में छाए हैं घन क्यूँ?

मोर कहीं पर नाचा होगा,

जीवन तेरे संग भी खेला।

चलना होगा तुझे अकेला।

तिल-तिल मरते सपनें तेरे,

पानी पर बनते हैं घेरे।

इन घेरों को तोड़ दे मन तू,

अब तक तूनें कितना झेला।

चलना होगा तुझे अकेला।

दूर गगन में पंछी उड़ता,

दाना-तिनका खानें को।

लगा रहता है आना-जाना,

जीवन जाल है एक झमेला।

चलना होगा तुझे अकेला।

17 टिप्पणियाँ:

नीरज गोस्वामी said...

तिल तिल मरते सपने तेरे
पानी पर बनते हैं घेरे....
वाह बाली जी वाह...कमाल की रचना...जीवन की विषमताओं का शशक्त चित्रण....
नीरज

seema gupta said...

चलना होगा तुझे अकेला।

किस का रस्ता देखे मन तू,
"सच कहा अकेले चलने का नाम ही जीवन है... भावपूर्ण प्रस्तुती ""किसका रास्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई, मिलो हैं खामोशी मीलों है तन्हाई. "
regards

Vijay Kumar Sappatti said...

kitni sacchi baat kahi aapne ,
zindagi ke jeene ke liye aapka ye andaaz bahut pasand aaya ..

bahut badhai ,

vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

रश्मि प्रभा said...

सच तो यही है.......चल अकेला
प्रशंसनिए

विनय said...

अकेले चलने में निरंतरता है! वाह!

Dr.Bhawna said...

सुन्दर रचना ...

Alag sa said...

योदि तोमार डाक शोने केऊ ना आशे,
तोबे एकला चोलो रे ।

mehek said...

इन घेरों को तोड़ दे मन तू,

अब तक तूनें कितना झेला।

चलना होगा तुझे अकेला।

bahut khubsurat mann ko raah dikhati rachana,har lafz dil se,bahut badhai

"अर्श" said...

बाली साहब देर से आने के लिए मुआफी चाहता हूँ बहोत बढ़िया कविता लिखा है बहोत सुदर भाव है भरे हुए आपको ढेरो बधाई साहब....

अर्श

राज भाटिय़ा said...

तिल तिल मरते सपने तेरे
पानी पर बनते हैं घेरे....
बहुत सुंदर कविता लिखी आप ने .
धन्यवाद

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाहवा बढ़िया कविता हैं बंधु जी साधुवाद स्वीकारें

JHAROKHA said...

Respected Baliji,
Mere blog par ane aur tareef karne keliye bahoot bahoot dhanyavad.Apkee rachna... chalna hoga tujhe akela... padh kar Gurudev Tagor ji ki yad ho ai...Sundar rachna ke liye badhai.Asha hai age bhee mera utsah badhaenge.

पुरुषोत्तम कुमार said...

अच्छी कविता। पढ़कर बहुत अच्छा लगा।

vimi said...

behad hi umda rachna hai aapki.... jeevan ka satya ujagar karti...

Amit said...

तिल तिल मरते सपने तेरे
पानी पर बनते हैं घेरे....

bahut sahi kaha hai..bahut he sundar likha hai baali saahab.....

kmuskan said...

चलना होगा तुझे अकेला।

किस का रस्ता देखे मन तू,

sahi likha hai ......
bahut aachi rachna ......badhai

प्रकाश बादल said...

वाह बाली जी वाह
सीधे शब्दों में तीखी रचना

बधाई

Post a Comment

आप द्वारा की गई टिप्पणीयां आप के ब्लोग पर पहुँचनें में मदद करती हैं और आप के द्वारा की गई टिप्पणी मेरा मार्गदर्शन करती है।अत: अपनी प्रतिक्रिया अवश्य टिप्पणी के रूप में दें।