Monday, May 14, 2007

छोटा मुँह बड़ी बात-१ (क्षणिकांए)

चिन्तन का ढंग

१.
कल हमारे मोहल्ले में
एक साइकिल पंचर हो गई
शोर मच गया-
शायद उग्रवादीयों ने की है
क्यूँकि-
साइकिल गैर मुस्लिम की थी।

२.

तुम जानते हो
कुत्ता कब पागल होता है?
मर्ज कब बिगड़ता है ?
जब सही औषधी से
निदान ना हो
या सही आदमी का
सम्मान ना हो।

३.

रोटी समस्या नही
रोटी तो बँट जाएगी
इन्सान में
इन्सानियत जब आएगी ।






5 comments:

  1. बहुत सही:

    रोटी समस्या नही
    रोटी तो बँट जाएगी
    इन्सान में
    इन्सानियत जब आएगी ।


    --बहुत गहराई है, बधाई. और लिखो, शुभकामनायें.

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  2. आपका "चिंतन का ढ़ंग" बेहद पसंद आया.

    रोटी समस्या नही
    रोटी तो बँट जाएगी
    इन्सान में
    इन्सानियत जब आएगी ।


    सही कहा है आपने. बधाई!

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  3. क्षणिका "घाव करे गंभीर" वाली विधा है..आपकी रचनाओं नें सूई का काम बखूबी किया है। बधाई..

    *** राजीव रंजन प्रसाद

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  4. Paramjit ji,

    Your blog has been added to HindiBlogs.com. I would appreciate if you can also link us back.

    Thanks & Regards,

    Punit Pandey

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  5. बहुत अच्छा और बहुत पते का लिखा है आपने।
    घुघूती बासूती

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