हम से होकर अनंत दिशाएं चारों ओर जाती हैं....लेकिन सभी दिशाएं वापिस लौटनें पर हम में ही सिमट जाती हैं...हम सभी को अपनी-अपनी दिशा की तलाश है..आओ मिलकर अपनी दिशा खोजें।
Saturday, May 30, 2009
गजल
जब भरे हुए जामों को, कोई होठों से लगाए,
तुम ही बता दो यार कोई कैसे मुस्कराएं।
दिल की अन्धेरी शब में घुटकर मरे तमन्ना,
तब किसकी आरजू को हँस कर गले लगाएं।
दुनियामे जबहम आए थे दुनियाकी ठोकरों मे,
है कौन जो झुक के हमको, थाम अब उठाए।
हमें भेजनें वाले ,थी क्या खता हमारी ,
पत्थरों के इस जहाँ में,किसे दर्द ये बताएं ।
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अच्छी गज़ल अच्छे भाव ।
ReplyDeleteबहुत उम्दा गज़ल!! बधाई.
ReplyDeleteअच्छी कोशिश बात कहने की।
ReplyDeleteसादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
bare hue zaamon ko hothon se lagaye,
ReplyDeletekoi kaise muskuraye....bahut khoob
लाजवाब ग़ज़ल है............ कुछ शेर तो कमल के हैं
ReplyDeletebahut badhiya......shandaar.
ReplyDeleteबाली जी ग़ज़ल ठीक है काफिये बहर का ध्यान रखा नहीं हैं आपने...आप बहुत अच्छा लिखते हैं...इसीलिए आप से बेहतर ग़ज़ल की उम्मीद रखते हैं हम हमेशा...लिखते रहिये...
ReplyDeleteनीरज
ACHHE BHAAV HAI AAPKI RACHNA ME .... BERADIF, BEBAH'R GAZAL MAAN LETE HAI CHALEGA MAGAR NEERAJ JI KE BAATO KO JARUR SAMAJHE.... AAPKI LEKHANI UMDAA HAI AUR KHUB BARASTI HAI.... DHERO BADHAAYEE
ReplyDeleteARSH
बात तो पुरानी है लेकिन ढग कहने का नया है ! सुन्दर लगी रचना !
ReplyDeleteबहुत ख़ूबसूरत अंदाज़े-बयाँ
ReplyDeleteबहुत सुंदर लिखा है आपने। सारा दर्द उढ़ेल दिया।
ReplyDeleteपत्थरों के इस जहाँ में,किसे दर्द ये बताएं ।
ReplyDelete---
सही भैया! मौन रहकर घूट पीना बेहतर पॉलिसी है।
wah kya baat hai !
ReplyDeleteghazal ka pahlaa sher padhkar ye sher yaad aa gaya ( shayad haali ka hai )-
haal-e-dil yaar ko likhoon kyonkar ,
haath dila se judaa nahi hota
... umdaa gajal !!!!!
ReplyDeleteमन और मस्तक दोनों को झकझोरती
ReplyDeleteसुन्दर गजल।
बधाई।
अच्छी रचना है बधाई......!
ReplyDeleteदिल की बात सुन्दर तरीके से कही हुई - बहुत खूब!
ReplyDeleteबेहतर प्रयास.... बधाई एवं शुभकामनाएं...
ReplyDeletebhut pyari gajal
ReplyDeleteभई परमजीत बहुत अच्छी गजल। ये तस्वीर खुद खींची है क्या। अब मिलते रहेंगे।
ReplyDeleteउत्तम भावः, थोडा और सकारात्मक हुआ जा सकता है हमे आस पास के बारे में .
ReplyDeleteJnab aapki kalm oor akal ko bagwqan barkat de KHUSHAMDEEN Shbaa Kher Thakur (ddthakur2@gmail.com)
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